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आरोप : बिहार के एक गांव में कोरोना ने लगाई सेंध, ग्रामीण नाराज़

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सरेयां ग्राम में कोरोना का मरीज मिलने के बाद बल्लियां लगाकर पूरे गांव को सील कर दिया गया है.

यह कहानी है बिहार के एक गांव में कोरोना महामारी के फैलने की. घटना मुंबई से कठिनाइयों से भरा सफर करने के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण क्षेेेत्र के अरेराज नगर पंचायत से करीब तीन कोस दूर बसे सरेयां गांव पहुंचे उमर आलम की है. इस घटना में आरोप लगा है, सरेयां ग्राम में रहने वाले एक तथाकथित नेता पर. आरोप है कि सिर्फ वोट बैंक मजबूत करने के चक्कर में यह कारनामा अंजाम दिया गया है. अब स्थानीय लोग कोरोना की धमक से सहमे हुए हैं. उनमें नाराज़गी व्याप्त है.

गांव के चौक की सारी दुकानों को भी सील कर दिया गया है.

इस घटना को जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इस तरह के तथाकथित नेता पूरे देश में हैं. वे अपने रसूख के शोऑफ में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना को पांव पसारने का मौका दे रहे हैं. आरोपों के संदर्भ में जानकारी के मुताबिक, बिहार के पूर्वी चंपारण क्षेत्र के मोतिहारी जिले में कोरोना ने पांव पसार रखा है. लोगों में इस भयावह बीमारी का तनाव है. वे रोजमर्रा की ज़िंदगी भी सहम कर जी रहे हैं. इसी जिले में अरेराज नगर पंचायत भी है. वहां रेफरल हॉस्पिटल के एएनएम सेंटर को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है. उक्त स्थान पर बिहार सरकार के निर्देश के बाद जिला प्रशासन की देखरेख में प्रवासी मजदूरों को रखा जा रहा है. वे वहां अपने क्वारंटाइन समयसीमा को पूरा करने के बाद ही अपने परिवार के बीच जा सकते हैं. मगर ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त क्षेत्र से करीब तीन कोस दूर स्थित सरेयां ग्राम पंचायत में इस तथाकथित नेता ने पूरे गांव को कोरोना की जद में पहुंचा दिया है.

ग्रामीणों के मुताबिक सरेयां ग्राम में उमर आलम नाम का एक शख्स रहता है. वह अपने जीवनयापन के लिए मुंबई में कपड़ा सिलाई का काम करता था. लॉकडाउन के चलते उसे भी रोटी की तलाश में अपने गांव पहुंचना पड़ा. तमाम दिक्कतों से जूझते हुए वह मुंबई से हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके अपने गांव पहुंचता है. वहां पहुंचने पर उसे स्थानीय जिला प्रशासन ने अरेराज नगर क्षेत्र में बनाए गए एएनएम क्वारंटाइन सेंटर में ठहरने का आदेश दिया. मगर आलम की ख़्वाहिश थी कि वह अपने परिवार के साथ ईद मनाए.

पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है.

स्थानीय लोगों के आरोप के मुताबिक, इस तथाकथित नेता के प्रभाव में उमर आलम को क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने से पहले ही घर भेज दिया गया. हालांकि, उसे पूरी हिदायत दी गई थी कि वह अपने परिवार में क्वारंटाइन रहे. लोगों से न मिले. कहीं टहलने-घूमने न जाए. मगर वह सारे कायदे-कानून भूल गया.

नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि वह बाजार घूमने गया. नाई से दाढ़ी-बाल भी कटवाया. अपने पड़ोसियों और नातेदारों से मिलने भी गया. वह 13 मई को क्वारंटाइन किया गया था. उसे नौवें दिन उसके घर भेजा गया था. वह मात्र 24 घंटे में ही पूरे गांव के चक्कर लगा चुका था. दसवें दिन यानी 22 मई को उसकी Covid19 की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है. प्रशासन के हाथ-पांव फूल जाते हैं. वे आनन-फानन में उमर आलम को 23 मई को सुबह 10 बजे तक क्वारंटाइन सेंटर ले जाते हैं. फिर उसकी शिनाख्त के आधार पर उसके सम्पर्क में आने वालों को भी चुना जाता है. अब पूरा गांव सील है. लोगों के आने-जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है. गंगा-जमुनी तहजीब वाले उस गांव में अब ईद की खुशियां काफूर हो गई हैं.

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