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UP : एटा के बिल्सड़ में ASI ने खोद निकाले पांचवीं सदी में बने मंदिर के अवशेष

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मंदिर की एक सीढ़ी पर शंख लिपि में ‘श्री महेंद्रादित्य’ उकेरा गया है, महेन्द्रादित्य गुप्त वंश के सम्राट कुमारगुप्त प्रथम की उपाधि थी…

लखनऊ. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई/ASI) के आगरा सर्किल को एटा में संरक्षित स्थल बिल्सड़ की खुदाई के दौरान पांचवीं शताब्दी में बने मंदिर के अवशेष मिले हैं. मंदिर की एक सीढ़ी पर शंख लिपि में ‘श्री महेंद्रादित्य’ उकेरा गया है. महेन्द्रादित्य गुप्त वंश के सम्राट कुमारगुप्त प्रथम की उपाधि थी. इसीलिये अभी यही माना जा रहा है कि यह मंदिर उन्हीं के समय बनवाया गया होगा.

एएसआई की खोदाई में मंदिर के अवशेष. Courtesy : Google Image

बता दें कि जिला मुख्यालय से 59 किलोमीटर दूर स्थित बिल्सड़ ऐतिहासिक महत्व का स्थान है. यहां के टीलों में गुप्तकालीन सभ्यता के अवशेष अभी भी मौजूद हैं. यहां स्थित संरक्षित स्थल में कुमारगुप्त प्रथम के समय के दो पिलर लग हुए हैं. इन पिलर पर मानव आकृतियां बनी हुई हैं. पिलर की गहराई नापने को एएसआई ने यहां वैज्ञानिक तरीके से उत्खनन कराया था. थोड़ी सी खोदाई के बाद प्राचीन निर्माण के अवशेष नजर आने लगे. उत्खनन जारी रखने पर चार सीढ़ियां और एक मंच सरीखा स्थान मिला. सीढ़ियां पत्थर की और प्लेटफार्म ईंट का बना है. एएसआई ने बताया कि आगरा सर्किल के लिए यह बड़ी उपलब्धि है. यह पुरावशेष पांचवीं शताब्दी के गुप्त सम्राट कुमारगुप्त के समय के हैं. इसके आगे चारदीवारी के कारण खोदाई सम्भव नहीं हो सकी. यह पूरा क्षेत्र टीले पर बसा हुआ है.

सम्राट अशोक ने 100 फीट ऊंचा एक स्तूप भी बनवाया था

बिल्सड़ में एक गुप्तकालीन मंदिर तथा किला भी था. कई दशक पहले यहां कराई गई खोटाई में मंदिर के चार स्तंभ निकले थे. यहां सम्राट अशोक ने 100 फीट ऊंचा एक स्तूप भी बनवाया था, जहां भगवान बुद्ध ने सात दिन तक उपदेश दिया था. यहां की खोदाई में पौराणिक देवताओं के अवशेष और प्राचीन मूर्तियां भी प्राप्त हुई हैं. इतिहासकार स्वर्गीय महावीर द्विवेदी की पुस्तक मंगलम में बिल्सड़ का काफी उल्लेख है. इस जगह का प्राचीन नाम बिरियागढ़ था. वहीं, पांचवीं शताब्दी के पुरावशेष लखीमपुर खीरी, गाजीपुर में भीतरी, बरेली में अहिच्छत्र, एटा में अतरंजीखेड़ा में भी मिले हैं. लखीमपुर खीरी में घोड़े की मूर्ति मिली थी.

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