यह फ़ैसला रविवार को टेक्निकल इंटरवेंशन इन डेवेलपिंग डायग्नोस्टिक मॉडलटीज यूजिंग आयुर्वेदिक प्रिंसिपल्स एन्ड कांसेप्ट विषयक वेबीनार के दौरान लिया गया.

एकेटीयू की मदद से राज्य आयुष सोसायटी देश के आयुर्वेद को एक बेहतर मुकाम हासिल कराएगा…

आयुष विभाग ने कोरोना को अब मात देने की ठान ली है. इम्यूनिटी को मजबूत करने की इस ‘जंग’ में उसके पास अब AKTU के बनाए ‘हथियार’ होंगे. रविवार को इस बारे में आयुष विभाग और एकेटीयू के बीच सफल वार्ता हुई है. यानी चंद दिनों के बाद ही एकेटीयू के दिए आईटी वाले मजबूत पंख लगाकर आयुर्वेद अब नई उड़ान भरेगा. वह लोगों तक पहुंच बढ़ाएगा. उन्हें हर बीमारी से लड़ने के योग्य बनाएगा.

कोरोना काल में वेबिनार की मदद से रविवार को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक (AKTU) और उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी के मध्य बैठक का आयोजन किया गया था. वेबिनार का संचालत डॉ रवी श्रीवास्तव ने किया था. इस दौरान दोनों के बीच आयुर्वेद को और कारगर बनाने की दिशा में काम करने के लिए संयुक्त रूप से संकल्प लिया गया.

आयुर्वेद के सिद्धांतों एवं डाटा की मदद से डायग्नोस्टिक टूल विकसित हो : राजकमल

राजकमल यादव, उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी के मिशन डायरेक्टर और आयुष विभाग के विशेष सचिव.

इस बारे में जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसायटी के मिशन डायरेक्टर और आयुष विभाग के विशेष सचिव राजकमल यादव ने बताया, ‘एकेटीयू की मदद से राज्य आयुष सोसायटी देश के आयुर्वेद को एक बेहतर मुकाम हासिल कराएगा. इसके लिए एकेटीयू मशहूर आयुर्वेद चिकित्सकों व अस्पतालों से सूचना एकत्र करके उसका एनालिसिस कर नए टूल विकसित करेेेेेगा.’ उन्होंने अपनी बात पूरी करते हुए कहा, ‘जल्द ही…हम एकेटीयू की सहायता से आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए अपने स्वास्थ्य केंद्रों को और मजबूत बनाएंगे.’ उन्होंने कहा कि वर्तमान में आयुर्वेद का प्रयोग और उपयोगिता किसी से छिपी नहीं है. यह वेबिनार बहुत ही प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि हमें आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए एआई आधारित आयुर्वेद के सिद्धांतों एवं डाटा की मदद से डायग्नोस्टिक टूल विकसित करना चाहिए. उन्होंने कहा इस क्षेत्र में प्रदेश का आयुष विभाग एकेटीयू के साथ मिलकर कार्य प्रारंभ करेगा.

AKTU इन बिंदुओं पर करेगा काम…

प्रो. विनय पाठक, वीसी, एकेटीयू.

एकेटीयू की ओर से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, एकेटीयू देशभर के मशहूर आयुर्वेद चिकित्सकों व अस्पतालों से डेटा एकत्र कर इसका एनालिसिस कर टूल विकसित करने का काम करेगा. इस बीच कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने आयुर्वेद में तकनीक के माध्यम पर जोर देने की बात कही. वहीं, विशेष सचिव राजकमल यादव ने इसमें आयुष विभाग की सहभागिता पर सहमति जताई. कुलपति ने कहा कि वर्तमान दौर तकनीक का दौर है. आयुर्वेद एक पौराणिक और विश्वसनीय चिकित्सा पद्धति है. पौराणिक काल से आयुर्वेद मौजूद होने के कारण चिकित्सकीय डाटा की उपलब्धता भी पर्याप्त मात्र में है. ऐसे में आयुर्वेद की मदद से एआई बेस्ड रियल टाइम डायग्नोस्टिक टूल्स विक्सित किये जा सकते हैं जो सुदूर के क्षेत्रों चिकित्सा सुविधाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं.

…दोनों मिलकर बहुत से डायग्नोस्टिक टूल विकसित कर सकते हैं

इस अवसर पर वैद्य करतार सिंह धिमान ने बताया कि आयुर्वेद के सिद्धांत बहुत ही स्पष्ट हैं. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के सिद्धांत लम्बे समय से उपयोग में लाये जाने के चलते बहुत सटीक डाटा उपलब्ध करवाते हैं. ऐसे में यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से डायग्नोस्टिक टूल डेवेलप किया जाये तो वह रियल टाइम में एक्यूरेट डायग्नोसिस करने में सक्षम होगा. उन्होंने बताया कि सीसीआरएएस के द्वारा कई सॉफ्टवेयर एवं टूल विकसित किए गए हैं. इनमें प्रकृति सॉफ्टवेयर, हेल्थ एसेसमेंट सॉफ्टवेयर, चर्तुविधि अग्नि स्केल शामिल हैं. साथ ही, आईआईटी के साथ मिलकर क्षारसूत्र आपरेटस विकसित किया गया है. उन्होंने कहा कि एकेटीयू का एआई सपोर्ट और आयुर्वेद का डेटाबेस मिलकर बहुत से डायग्नोस्टिक टूल विकसित कर सकते हैं.

‘चिकित्सा के क्षेत्र में डायग्नोस्टिक का बेहतर विकल्प’

वहीं, आरोग्य भारती के संगठन मंत्री डॉ अशोक वार्ष्णेय ने इस दौरान कहा, ‘आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध में बायोटेक्नोलॉजी की एप्लीकेशन भी कारगर सिद्ध हो सकती हैं. बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आयुर्वेद का कोलैबरेशन समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकता है. इससे इतर प्रो पवन गोदात्वर ने कहा कि वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसा टूल है जो चिकित्सा के क्षेत्र में डायग्नोस्टिक का बेहतर विकल्प हो सकता है. उन्होंने कहा कि आयुर्वेद सिद्धांतो को ध्यान में रखते हुए डायग्नोस्टिक लिए विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं. साथ ही वैद्य मधुसुदन देशपाण्डेय ने क्लीनिक में डाटा कलेक्शन और डॉक्यूमेंटेशन के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की.

मीटिंग में रहे मौजूद…

यह फ़ैसला रविवार को टेक्निकल इंटरवेंशन इन डेवेलपिंग डायग्नोस्टिक मॉडलटीज यूजिंग आयुर्वेदिक प्रिंसिपल्स एन्ड कांसेप्ट विषयक वेबीनार के दौरान लिया गया। वेबीनार का आयोजन विश्वविद्यालय, राज्य आयुष सोसायटी, आरोग्य भारती एवं ओजस फाउंडेशन एंड नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया. इसमेें मुख्य अतिथि निदेशक सेन्ट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस के निदेशक वैद्य करतार सिंह धीमान रहे तथा आरोग्य भारती के संगठन मंत्री डॉ अशोक वार्ष्णेय, आयुष विभाग के विशेष सचिव राज कुमार यादव के साथ ही प्रो एमके दत्ता, डीन पीजीएसआर ने बतौर विशिष्ट अतिथि हिस्सा लिया. डॉ जीएस तोतेजा, अपर महानिदेशक, आईसीएमआर, प्रो एमएस बघेल, एक्स चेयरमैन, आयुर्वेदा चेयर, डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्माकोलॉजी मेडिकल स्कूल यूनिवर्सिटी ऑफ़ देहरादून, वैद्य मधुसुदन देशपाण्डेय, राष्ट्रीय गुरु, राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, प्रो पवन गोदात्वर, डीन रिसर्च, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद, जयपुर, प्रो जय किरण किनी, डायरेक्टर रिसर्च, वाईएमटी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, मुंबई, डॉ रवी श्रीवास्तव, सह आचार्य राजकीय आयुर्वेद कॉलेज एवं हॉस्पिटल, जबलपुर, डॉ यशवंत जुनेजा, एमडी पंचकर्म ने बतौर वक्ता प्रतिभाग किया. आयुर्वेदाचार्य डॉ वंदना पाठक ने वेबिनार आयोजन के उद्देश्य के विषय में जानकारी देते हुए सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया.

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