मशहूर चिपको आंदोलन के प्रणेता रहे सुंदरलाल बहुगुणा को 8 मई को ही कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था…

शुक्रवार को मशहूर पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का कोरोना के कारण निधन हो गया. वह कोरोना पॉजिटिव थे और उनका इलाज ऋषिकेश एम्स में किया जा रहा था. मशहूर चिपको आंदोलन के प्रणेता रहे सुंदरलाल बहुगुणा को 8 मई को ही कोरोना संक्रमित होने के बाद एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. सुंदरलाल बहुगुणा की उम्र 94 साल थी.

चिपको आंदोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आंदोलन था. यह भारत के उत्तराखण्ड राज्य में किसानों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था. वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे. यह आंदोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन 1973 में प्रारम्भ हुआ.

एक दशक के अंदर यह पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में फैल गया था. चिपको आंदोलन की एक मुख्य बात थी कि इसमें स्त्रियों ने भारी संख्या में भाग लिया था. इस आंदोलन की शुरुआत 1970 में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, कॉमरेड गोविन्द सिंह रावत, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा गौरादेवी के नेत्रत्व में हुई थी.

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