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कोविड के कारण नौ हज़ार से अधिक बच्चे हो गये बेसहारा : NCPCR

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उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना से 2309 बच्चे बेसहारा पाये गए हैं. इनमें से 287 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना के कारण अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है…

नई दिल्ली (एजेंसियां). राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 29 मई तक राज्यवार आंकड़ों के मुताबिक 9,346 बच्चे कोरोना महामारी के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं. इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल हैं जो अपने माता-पिता में से किसी एक को खो चुके हैं.

सांकेतिक तस्वीर. Courtesy : Google Image

जस्टिस एलएन राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष पेश एक अलग नोट में महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि 30 मई तक राज्य के विभिन्न इलाकों से मिली जानकारी के अनुसार 4,451 बच्चों ने अपने माता-पिता में से एक को खो दिया है. वहीं, 141 बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है. दरअसल, उच्चतम न्यायालय बाल गृहों में कोविड फैलने पर स्वत: संज्ञान लेने से जुड़े एक मामले में सुनवाई कर रहा है.

एनसीपीसीआर ने वकील स्वरूपमा चतुर्वेदी के जरिये दायर हलफनामे में कहा कि ऐसे सबसे ज्यादा 2,110 बच्चे उत्तर प्रदेश में हैं. इसके साथ ही बिहार में 1,327, केरल में 952 और मध्य प्रदेश में 712 बच्चे कोरोना महामारी के कारण अनाथ हो गए या फिर माता-पिता में से किसी एक को खो दिया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मार्च 2020 से कोविड-19 महामारी के कारण कुल 1,742 बच्चे अनाथ हो गए हैं. वहीं, 140 बच्चों को त्याग दिया गया है. इसके अलावा 7,464 बच्चों ने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है.

सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 2,110 बच्चे महामारी से प्रभावित हुए हैं. इनमें से 270 बच्चे अनाथ, उनके दोनों अभिभावकों की मृत्यु हो चुकी है. 10 बच्चों को उनके माता-पिता ने त्याग दिया है. 1,830 बच्चों के एक अभिभावक की मृत्यु हो चुकी है. उधर, बिहार में कुल 1,327 बच्चे प्रभावित हुए हैं. इसमें 1,035 ने एक अभिभावक और 292 ने दोनों अभिभावकों को खो दिया है.

उसके बाद केरल में 952 बच्चे प्रभावित हुए, जिनमें से 49 अनाथ हुए, 8 को त्याग दिया गया और 895 बच्चे एक अभिभावक को खो दिया है. मध्य प्रदेश में अनाथ बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जहां 318 बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया है. इसी क्रम में बिहार में 292, उत्तर प्रदेश में 270 और तेलंगाना में 123 बच्चे हैं.

‘बाल स्वराज’ से बच्चों को रहे संभाल

देश की सबसे बड़ी अदालत ने राज्य सरकारों से कहा कि वे सात जून तक एनसीपीसीआर की वेबसाइट ‘बाल स्वराज’ पर डेटा अपलोड करें और कोरोना वायरस संक्रमण के कारण प्रभावित हुए बच्चों से जुड़ा विवरण उपलब्ध कराएं. एनसीपीसीआर ने अपने हलफनामे में कहा कि कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी और बड़ी संख्या में लोगों की मौत होने के मद्देनजर यह जरूरी हो गया है कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं.

आयोग ने कहा कि उसने ‘बाल स्वराज’ पोर्टल तैयार किया है, जिसके जरिये ऐसे बच्चों का डेटा एकत्र किया जा रहा है. आयोग ने सुझाव दिया है कि जिन बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को कोविड-19 में खो दिया है और उन्हें एकल माता-पिता के साथ रखा गया है, उन्हें भी वित्तीय सहायता की आवश्यकता है और वे सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के हकदार हैं, इसलिए उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ और वित्तीय सहायता भी दी जाए. बता दें कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यों से मिली रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीते 25 मई को कहा था कि बीते एक अप्रैल से 25 मई तक कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में अपने माता-पिता के निधन के कारण 577 बच्चे अनाथ हो गए.

यूपी में सबसे ज्यादा अनाथ

उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना से 2309 बच्चे बेसहारा पाये गए हैं. इनमें से 287 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना के कारण अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है. सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़ व लखनऊ में ऐसे बच्चों की संख्या सर्वाधिक है. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे बच्चों की सुरक्षा के लिये ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ शुरू किया है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे बच्चों की परवरिश के लिये देश के सभी राज्यों को चेता चुकी है. सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसे बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिये आदेश जारी किये हैं.

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत उन बच्चों को सहायता राशि दी जाएगी, जिन्होंने कोरोना महामारी के कारण अपने माता-पिता या अभिभावक दोनों को को दिया है. इसके साथ ही ऐसे बच्चों को 18 साल की उम्र में मासिक सहायता  राशि और 23 साल की उम्र में पीएम केयर्स से 10 लाख रुपए का फंड भी दी जाने की बात कही गई है.

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