मुम्बई के टॉप कॉप में शुमार सचिन वाजे.

NIA की तरफ से अदालत से 14 दिनों की कस्टडी की मांग की गयी थी. NIA ने अदालत में कहा कि यह एक बड़ी साजिश है. इसमें कई लोगों के शामिल होने की आशंका है…

शनिवार की रात NIA की गिरफ्त में आये मुम्बई के टॉप कॉप सचिन वाजे को स्पेशल कोर्ट ने 25 मार्च तक के लिए NIA की कस्टडी में ही सौंप दिया है.

एनआईए ने वाजे के खिलाफ आपराधिक साजिश के लिए 120 (बी), विस्फोटक मामले में लापरवाही बरतने के लिए 286, जालसाजी के लिए 465, जाली सील का इस्तेमाल करने के लिए 473 और धमकाने के लिए 506(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है.

मृतक हिरेन की पत्नी ने लगाए थे संगीन आरोप

रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी के घर के बाहर बम मिलने के मामले में सचिन वाजे को 25 मार्च तक के लिए NIA की हिरासत में भेज दिया गया है. वाजे की तरफ से ठाणे की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गयी थी. लेकिन अदालत ने उनके अपील को खारिज कर दिया. NIA की तरफ से अदालत से 14 दिनों की कस्टडी की मांग की गयी थी.

NIA ने अदालत में कहा कि यह एक बड़ी साजिश है. इसमें कई लोगों के शामिल होने की आशंका है. जो स्कॉर्पियो अंबानी के घर के बाहर मिली थी, उसके मालिक मनसुख हिरेन थे. हिरेन 5 मार्च को ठाणे जिले में मृत पाए गए थे. हिरेन की मौत के बाद उनकी पत्नी ने सचिन वाजे पर हत्या का आरोप लगाया था. जिसके बाद से उनकी गिरफ्तारी की मांग की जा रही थी.

सोशल मीडिया पर दिया था ‘अलविदा’ का संदेश

मनसुख हिरेन की पत्नी विमला हिरेन ने कुछ दिन पहले ATS के सामने कई गंभीर आरोप सचिन वाजे पर लगाए थे. उनके द्वारा लगाए गए आरोप को लेकर बीजेपी नेता फडनवीस ने विधानसभा में कई सवाल उठाए थे.
NIA के दक्षिण मुंबई स्थित दफ़्तर में जाने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनके साथी पुलिस अधिकारी उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. संदेश के अंत में उन्होंने ये भी लिखा, “दुनिया को अलविदा कहने का वक़्त नज़दीक आ रहा है.”

2004 में भी किये गए थे गिरफ्तार

दरअसल, एनआईए की पूछताछ शुरू होने से पहले वाजे ने अपने वॉट्सऐप पर एक संदेश लगाया हुआ था जिसमें लिखा था, “3 मार्च, 2004. सीआईडी के साथी अफसरों ने मुझे एक झूठे केस में गिरफ़्तार किया. उस गिरफ़्तारी की वजह आज तक स्पष्ट नहीं हुई है. मुझे लग रहा है कि इतिहास ख़ुद को दोहरा रहा है. मेरे साथी अधिकारी मुझे फिर झूठे केस में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बार थोड़ा अंतर है. तब मेरे पास शायद उम्मीद, धैर्य, जीवन और सर्विस के 17 साल थे. अब मेरे पास 17 सालों का जीवन, सर्विस और जीने का धैर्य नहीं बचा है. मुझे लगता है कि दुनिया को अलविदा कहने का वक़्त नज़दीक आ रहा है.”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here