कोरोना महामारी ने इस साल मानवता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. हर दिन यह संख्या बढ़ती जा रही है. शुक्रवार को दादी चंद्रो तोमर की भी इस डेडली वायरस ने जान ले ली.

निशानेबाजी में भी उनका कोई सानी नहीं था. उन्होंने उम्र और परिस्थितियों को धता बताते हुए यह उपलब्धि हासिल की थी. वह विगत कई दिनों से कोरोना से पीड़ित थीं. उनका एक अस्पताल में इलाज भी चल रहा था. जहां यह बताया जा रहा था कि उन्हें सांस लेने में दिक्कत ही रही है.

हाल ही में उन पर एक फ़िल्म भी आई थी, जिसका नाम था “सांड की आंख.” उन्होंने अपने जीवन में अपनी बहन प्रकाशी तोमर के साथ कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था. प्रकाशी भी दुनिया की उम्रदराज महिला निशानेबाजों में शामिल हैं. इन दोनों बहनों की जिंदगी पर ही फिल्म बनी थी. घर के पुरुषों ने उनकी निशानेबाजी पर आपत्ति जताई थी.

दादी चंद्रो तोमर 89 साल की थीं. वह बागपत जिले में परिवार सहित रहती थीं. बॉलीवुड फिल्‍म सांड की आंख चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के वास्तविक जीवन पर आधारित है. अभिनेता आमिर खान ने दोनों शूटर दादी की कहानी से प्रभावित होकर उन्‍हें अपने शो सत्‍यमेव जयते में भी बुलाया था.

मगर उनके बेटों, बहुओं और पोते-पोतियों ने उनका पूरा साथ दिया. इससे वे घर से निकलकर पास के रेंज में अभ्यास करने के लिये जा पाईं. एक बार खेल अपनाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते. ‘शूटर दादी’ के नाम से जानी जाने वाली चंद्रो तोमर वरिष्ठ नागरिक वर्ग में कई पुरस्कार भी हासिल कर चुकी थीं. उनमें स्त्रीशक्ति सम्मान भी शामिल है जिसे स्वयं राष्ट्रपति ने भेंट किया था.

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