ममता बनर्जी ने कहा कि घटना उस वक्त घटी जब वह रियापारा इलाके में एक मंदिर के बाहर खड़ी थीं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने बुधवार की शाम को आरोप लगाया कि जिस वक्त वह चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम (Nandigram) में थीं उस समय धक्का-मुक्की दिए जाने की वजह से उन्हें चोट लग गई. इसी के साथ इस घटना को लेकर सच-झूठ के दावे वाले सवालों की झड़ी लग गई है. इधर तीन चश्मदीदों ने ममता के आरोपों को नकार दिया तो उधर चुनाव आयोग ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है.

ममता बनर्जी ने कहा कि घटना उस वक्त घटी जब वह रियापारा इलाके में एक मंदिर के बाहर खड़ी थीं. ममता बनर्जी के इन आरोपों को बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने ड्रामेबाजी करार दिया. बीजेपी ने इस घटना को लेकर सीबीआई जांच की मांग तक कर डाली. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्या है सीएम की सुरक्षा को लेकर स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल और सीएम ममता का क्या है आरोप?

घायल ममता ने कहा, पैर में सूजन आने से आया बुखार

अस्पताल में भर्ती मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर.

पश्चिम बंगाल की सीएम ने कहा, ‘मैं अपनी कार के बाहर खड़ी थी जिसका दरवाजा खुला था. मैं वहां मंदिर में प्रार्थना करने जा रही थी. कुछ लोग मेरी कार के पास आए और दरवाजे को धक्का दिया. कार का दरवाजा मेरे पैर में लग गया.’ मुख्यमंत्री ने दावा किया कि चोट लगने की वजह से उनके पैर में सूजन आ गयी और उन्हें बुखार जैसा लग रहा है.

सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

उन्होंने कहा कि घटना के समय मौके पर कोई स्थानीय पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था. नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ रहीं बनर्जी ने आरोप लगाया कि घटना के पीछे साजिश है. इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गये हैं क्योंकि मुख्यमंत्री को जेड-प्लस की सुरक्षा प्राप्त है.

चश्मदीद ने हमले की बात को नकारा

‘हमले’ के मामले में स्थानीय चश्मदीदों के बयान सामने आए हैं. समाचार एजेंसी ANI ने चश्मदीदों से बात की है और उनके बयान को सामने रखा है, जिन्होंने ममता पर हमले के टीएमसी के दावे को खारिज किया है. हालांकि पूरा सच जांच के बाद ही सामने आएगा. एएनआई से बातचीत में चश्मदीद युवा छात्र सुमन मैती ने कहा, “मुख्यमंत्री जब यहां आईं तो पब्लिक ने उन्हें घेर लिया. उसी समय उनकी गर्दन और पैर में चोट आई. उन्हें किसी धक्का नहीं दिया, उनकी कार चल रही थी.” वहीं नंदीग्राम के बिरूलिया में मौके पर उपस्थित रहे एक दूसरे चश्मदीद चितरंजन दास ने कहा, “मैं वहीं था, मुख्यमंत्री अपनी कार में बैठी थीं, लेकिन दरवाजा खुला था. दरवाजा एक पोस्टर से टकराने पर बंद कर दिया गया. किसी ने धक्का नहीं दिया. कोई दरवाजे के पास नहीं था.”

सीएम की सुरक्षा और प्रोटोकॉल

स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल के मुताबिक, हमेशा एक सेफ हाउस और आकस्मिक हॉस्पीटल साथ रहता है. हमले की सूरत में फौरन उन्हें सेफ हाउस ले जाया जाता है और उसके बाद आकस्मिक हॉस्पीटल जो एंबुलेंस में भी हो सकता है. दुर्घटना में घायल होने की सूरत में एंबुलेंस के अलावा किसी और गाड़ी में लेकर नहीं ले जाया जा सकता है. इस एबुलेंस में एएलएस (एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट) के साथ सभी आपातकालीन सुविधाएं रहती हैं. ममता बनर्जी ने छाती में दर्द की शिकायत की थी. सीने में दर्ज अत्यंत आकस्मिक घटना है. एसओपी के मुताबिक, ऐसे समय में उन्हें फौरन पास के आकस्मिक अस्पताल में ले जाया जाएगा.

भाजपा ने कहा, ड्रामाबाजी है सब

ममता पर हमले के बाद, भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ‘ये ममता का सियासी स्टंट है।’ वहीं पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने कहा, ‘ममता बनर्जी ने हमदर्दी पाने के लिए ड्रामा किया। उनके साथ भारी पुलिस फोर्स मौजूद था। ऐसे में उनके करीब कौन पहुंच सकता है? जो 4 IPS अफसर उनकी सिक्योरिटी के इंचार्ज हैं, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए। हमला करने वाले अचानक तो प्रकट नहीं हुए होंगे। उन्हें पकड़ा जाना चाहिए।’

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